नई दिल्ली। देश की राजधानी में नकली उत्पादों का जाल गहराता जा रहा है। अब बाज़ार में बिकने वाला लोकप्रिय एंटासिड पाउडर ENO भी नकली रूप में मिलने लगा है। बाहरी दिल्ली के औद्योगिक इलाके में पुलिस ने छापा मारकर एक अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है, जहां नकली ENO तैयार कर दिल्ली-एनसीआर से लेकर हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक सप्लाई की जा रही थी। छापेमारी के दौरान पुलिस को देखकर आरोपी हड़बड़ा गए, लेकिन टीम ने मौके से फैक्ट्री मालिक सहित तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। वहां से करीब 1 लाख नकली पाउच, ढेरों डिब्बे, ब्रांडेड होलोग्राम, सीलिंग मशीनें और कच्चा माल बरामद हुआ। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह असली ENO की पैकिंग जैसी हूबहू रैपर बनवाकर बाजार में उतारता था। बाहर से पाउच को देखकर ग्राहक असली और नकली में फर्क नहीं कर पाते थे। अंदर भरा पाउडर सस्ते और घटिया केमिकल्स का मिश्रण होता था, जो पेट के बजाय शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। सूत्रों के अनुसार, यह फैक्ट्री पिछले कई महीनों से सक्रिय थी। आरोपी स्थानीय स्तर पर पाउडर तैयार करते थे और थोक विक्रेताओं के जरिये बाजार में बेचते थे। पैकिंग पर कंपनी का नाम और लोगो भी वैसा ही छापा जाता था जैसा असली ENO पर होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नकली उत्पादों का सेवन बेहद खतरनाक है। इनमें मौजूद केमिकल्स पेट की झिल्ली को नुकसान पहुंचा सकते हैं और गंभीर गैस्ट्रिक इंफेक्शन, अल्सर या फूड पॉइजनिंग जैसी बीमारियां पैदा कर सकते हैं। पुलिस ने इस मामले में कॉपीराइट एक्ट, धोखाधड़ी और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई और फैक्ट्रियों के नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया — “प्रारंभिक जांच में पता चला है कि गिरोह लंबे समय से इस अवैध कारोबार में सक्रिय था। हम सप्लाई चेन के हर स्तर पर कार्रवाई करेंगे ताकि आम जनता तक ऐसे खतरनाक नकली उत्पाद न पहुंच सकें।” इस घटना के बाद ब्रांडेड दवा और एफएमसीजी कंपनियों को सतर्क किया गया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे केवल प्रमाणित दुकानों से उत्पाद खरीदें और रैपर पर छपी निर्माण तिथि, एमआरपी व बैच नंबर अवश्य जांचें। दिल्ली में नकली ENO का खुलासा यह दिखाता है कि अब न सिर्फ दवाएं, बल्कि घरेलू उपयोग की छोटी वस्तुएं भी नकली नेटवर्क के निशाने पर हैं। उपभोक्ताओं को जागरूक रहना होगा, वरना नकलीपन से होने वाला “आराम” जानलेवा भी साबित हो सकता है।









